हाईकोर्ट ने एयरफोर्स अधिकारी का तबादला सही ठहराया:व्यक्तिगत कठिनाई से ऊपर सेवा की जरूरत को प्राथमिकता दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय वायुसेना के एक स्क्वाड्रन लीडर के तबादले को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों में तबादला सेवा का सामान्य हिस्सा है और इसे व्यक्तिगत सुविधा या पारिवारिक कठिनाइयों के आधार पर नहीं रोका जा सकता। यह मामला स्क्वाड्रन लीडर दीपक सिंधु से संबंधित था। उन्होंने जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन से तेजपुर स्थानांतरण के आदेश को चुनौती दी थी। अधिकारी ने अपनी याचिका में बताया था कि उनके पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और उनकी एक किडनी निकाली जा चुकी है। उनकी माता 50 प्रतिशत बर्न सर्वाइवर हैं और उन्हें लगातार देखभाल की आवश्यकता है। स्क्वाड्रन लीडर सिंधु ने यह भी दलील दी थी कि पोस्टिंग नीति के अनुसार उनका जोधपुर में कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था। इसके जवाब में, केंद्र सरकार और वायुसेना ने तर्क दिया कि पोस्टिंग नीति केवल प्रशासनिक दिशा-निर्देश हैं और इसे कानूनी अधिकार के रूप में लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने संगठनात्मक आवश्यकता और संचालन क्षमता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी और जस्टिस डॉ. नुपूर भाटी की खंडपीठ ने अपने फैसले में माना कि अधिकारी की पारिवारिक परिस्थितियां सहानुभूति योग्य हैं। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि ये परिस्थितियां तबादले को रद्द करने का आधार नहीं बनतीं। पीठ ने टिप्पणी की कि यदि हर मामले में व्यक्तिगत कठिनाइयों के आधार पर राहत दी जाने लगे, तो इससे सशस्त्र बलों के अनुशासन और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने विशेष अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया और स्क्वाड्रन लीडर दीपक सिंधु के तबादला आदेश को बरकरार रखा।
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