हाईकोर्ट बोला कोविड में देरी पर चालक का अधिकार नहीं:ब्याज दुर्घटना के 30 दिन बाद मिलेगा, कोविड के कारण नवीनीकरण में देरी

हाईकोर्ट बोला कोविड में देरी पर चालक का अधिकार नहीं:ब्याज दुर्घटना के 30 दिन बाद मिलेगा, कोविड के कारण नवीनीकरण में देरी




पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि यदि किसी चालक ने ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले ही उसके नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन कोविड-19 के दौरान सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने के कारण लाइसेंस समय पर रिन्यू नहीं हो सका, तो इसका नुकसान चालक को नहीं उठाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में चालक को वैध लाइसेंसधारी माना जाएगा और बीमा कंपनी मुआवजा देने से इंकार नहीं कर सकती। जस्टिस पंकज जैन ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील का आंशिक रूप से निपटारा करते हुए कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के आदेश को अधिकांश रूप से बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने ब्याज की गणना में संशोधन करते हुए कहा कि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दुर्घटना की तारीख से नहीं, बल्कि दुर्घटना के 30 दिन बाद से देय होगा। चालक को मिला था 5.44 लाख रुपये मुआवजा कर्मचारी मुआवजा आयुक्त ने 27 फरवरी 2026 को घायल चालक सुखदेव पाल सिंह उर्फ सुखपाल सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 5,44,725 रुपये मुआवजा, चिकित्सा खर्च और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था। इस आदेश को बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बीमा कंपनी का तर्क था कि दुर्घटना के समय चालक के पास ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं था। कंपनी के अनुसार 25 जून 2021 से 18 नवंबर 2022 तक लाइसेंस के नवीनीकरण में अंतराल रहा, इसलिए बीमा कंपनी पर मुआवजा देने की जिम्मेदारी नहीं बनती। साथ ही कंपनी ने यह भी दलील दी कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 की धारा 4ए के तहत ब्याज दुर्घटना की तारीख से नहीं दिया जा सकता। चालक ने समय रहते कर दिया आवेदन चालक की ओर से अदालत को बताया गया कि उसने लाइसेंस समाप्त होने से पहले ही 15 जून 2021 को नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया था। सुनवाई के दौरान सहायक क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए), होशियारपुर ने रिकॉर्ड के आधार पर इसकी पुष्टि भी की। आरटीए ने बताया कि कोविड-19 के कारण कार्यालय का कामकाज प्रभावित होने से आवेदन लंबित रहा और 19 नवंबर 2022 को लाइसेंस का नवीनीकरण स्वीकृत किया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि चालक ने समय पर आवेदन कर अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी। यदि सरकारी प्रक्रिया में देरी हुई तो उसका खामियाजा चालक पर नहीं डाला जा सकता। अदालत ने कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के इस निष्कर्ष को सही माना कि चालक का लाइसेंस प्रभावी माना जाएगा और बीमा कंपनी मुआवजा देने के लिए बाध्य होगी। ब्याज को लेकर आदेश में संशोधन हालांकि, अदालत ने बीमा कंपनी की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत ब्याज दुर्घटना की तारीख से नहीं, बल्कि उसके 30 दिन बाद से देय होता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दुर्घटना के 30 दिन बाद से वास्तविक भुगतान होने तक दिया जाए।



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