हिमाचल में कल-परसों भारी ओलावृष्टि का अलर्ट:7 मई तक बारिश से राहत नहीं, ऊंचे पहाड़ों पर हो सकती है बर्फबारी, मौसम हुआ सुहावना

हिमाचल में कल-परसों भारी ओलावृष्टि का अलर्ट:7 मई तक बारिश से राहत नहीं, ऊंचे पहाड़ों पर हो सकती है बर्फबारी, मौसम हुआ सुहावना




हिमाचल प्रदेश में आज रात से वेस्टर्न डिस्टरबेंस फिर स्ट्रांग होकर बरसेगा। मौसम विभाग (IMD) इसे देखते हुए कल और परसों दो दिन तक भारी ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई भागों में 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तूफान और आसमानी बिजली भी गिर सकती है। IMD ने कल (रविवार को) चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिला में भारी ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट दिया है, जबकि सोमवार को कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिला को ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी जारी की गई है। लाहौल स्पीति और किन्नौर को छोड़कर अन्य सभी जिलों को येलो अलर्ट दिया गया है। इस दौरान लाहौल स्पीति और किन्नौर के अधिक ऊंचे पहाड़ों पर हल्का हिमपात भी हो सकता है। पहाड़ों पर इससे तापमान में और गिरावट आएगी। पांच से सात मई के बीच भी बारिश जारी रहेगी। दो से तीन डिग्री गिरेगा तापमान आज भी कुछेक क्षेत्रों में हल्की बारिश के आसार है। मौसम में बदलाव के बाद आज तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट आएगी। राज्य के ज्यादातर भागों में पहले ही अधिकतम और न्यूनतम पारा सामान्य से नीचे गिरा हुआ है। नाहन का तापमान सामान्य से 5.8 डिग्री नीचे गिरा नाहन के तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे ज्यादा 5.8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है और यहां का पारा 27.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। शिमला का तापमान भी सामान्य से 1.9 डिग्री की गिरावट के साथ 21.8 डिग्री, ऊना का 2.2 डिग्री की कमी के साथ 35.2, मंडी का 1.2 डिग्री नीचे कम के साथ 31.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम में बदलाव के बाद राज्य के मैदानी इलाकों की जनता ने भीषण गर्मी से राहत की सांस ली है। पहाड़ों पर भी इससे मौसम सुहावना हो गया है। ऐसे में देश के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी से बचने को पहाड़ों पर पहुंच रहे टूरिस्ट सुहावने मौसम का आनंद उठा रहे हैं। सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ी मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। शिमला जिला के कई भागों में पहले ही सेब की फसल ओलावृष्टि के कारण तबाह हो चुकी है। कई जगह सेब के पेड़ के साथ साथ एंटी हेल नेट और बांस भी तबाह हो गए है। सेब के साथ साथ फूलगोभी और मटर की फसल को भी ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है।



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