ट्रेनिंग लेने के बाद बहु फसली खेती की:धान के साथ रागी-मक्का और सब्जियां भी उगाईं, कमाई दोगुनी हो गई‎

ट्रेनिंग लेने के बाद बहु फसली खेती की:धान के साथ रागी-मक्का और सब्जियां भी उगाईं, कमाई दोगुनी हो गई‎




बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड के ग्राम कंगोली के किसान गुप्तेश्वर ने महज 0.80 हेक्टेयर जमीन पर अपनी मेहनत, सीखने की इच्छा और सरकारी योजनाओं का‎ सही उपयोग कर खेती में घाटे के सौदे को मुनाफे में तब्दील कर दिया है।‎ कुछ साल पहले तक गुप्तेश्वर पारंपरिक तरीके से धान की ही खेती करते थे। उत्पादन सीमित था। आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हों।‎ हालांकि, बदलाव की शुरुआत होने के बाद उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। कृषि विज्ञान केंद्र में मिली ट्रेनिंग और शैक्षणिक भ्रमण के बाद गुप्तेश्वर ने धान के साथ रागी,‎ मक्का, सब्जियां और गेंदा फूल की खेती शुरू कर दी।‎ नई तकनीकों, उन्नत बीज और बेहतर प्रबंधन के कारण उनकी फसल की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यहां पहले सालभर में करीब 51 हजार 800 रुपए‎ की आमदनी होती थी। अब यह बढ़कर 1 लाख 10 हजार 200 रुपए तक पहुंच गई है। यानी कम जमीन में दोगुनी से ज्यादा कमाई। गुप्तेश्वर ने खेती में फसल‎ चक्र, संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और उन्नत किस्मों का उपयोग करना शुरू किया। इससे न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि लागत भी नियंत्रित रही।‎ सब्जी और फूलों की खेती से उन्हें नियमित नकद आय मिलने लगी, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। आज उनके खेत में विविध फसलों की हरियाली नजर आती है‎ और यही विविधता उनकी आमदनी का सबसे बड़ा आधार बन गई है। वे अब खेती को जोखिम नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देख रहे हैं।‎ गुप्तेश्वर की सफलता ने गांव के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। वे अपने अनुभव साझा कर बताते हैं कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लें और नई‎ तकनीक अपनाएं, तो खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उनके प्रयासों से गांव में धीरे-धीरे अन्य किसान भी फसल विविधीकरण की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।‎ ऐसे बदली किसान की तकदीर: 0.80 हेक्टेयर जमीन में बहु-फसली खेती शुरू, धान के साथ रागी, मक्का, सब्जी और गेंदा की खेती, आत्मा योजना और कृषि विज्ञान‎ केंद्र से प्रशिक्षण, उन्नत तकनीक और बेहतर प्रबंधन अपनाया ,आय 51 हजार से बढ़कर1.10 लाख रुपए से अधिक हो गई है।‎



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