फलों की हटड़ी में विराजे नवनीत प्रियाजी:श्रीनाथजी को धराया चंदनी मलमल का शृंगार, अधिक मास में सजे विशेष मनोरथ
नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में अधिक मास के मनोरथों की श्रृंखला के तहत शनिवार को छाक लीला मनोरथ और ‘फल की हटड़ी’ का मनोहारी आयोजन किया गया। गोस्वामी तिलकायत राकेश महाराज एवं चिरंजीव गोस्वामी विशाल बावा की प्रेरणा से अधिक ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी पर ‘छाक लिए सिर श्याम बुलावत’ और ‘लीजे लालन अपनी छाक’ के भाव से विशेष मनोरथ सजाए गए। इस दौरान श्रद्धालुओं को विशेष श्रृंगार और कृत्रिम वन-उपवन के मनमोहक दर्शन हुए। चंदनी मलमल के श्रृंगार में सजे श्रीनाथजी
मनोरथ के तहत श्रीनाथजी को चंदनी मलमल का आड़बंद धराया गया। प्रभु का ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार किया गया, जिसमें मोती के आभूषण, चंदनी मलमल की गोल पाग, गोल कतरा, मोती के कर्णफूल, कमलछड़ी तथा गंगा-जमनी वेणु-वेत्र धारण कराए गए। छाक लीला के भाव को साकार करने के लिए विशेष छाक चित्रांकन की पिछवाई भी धराई गई। यमुना तट का भाव और गोपियों की उपस्थिति
मनोरथ के दौरान यमुना तट का भाव प्रस्तुत किया गया। इसमें गोपियों को दूध, दही और माखन लेकर प्रभु के समक्ष पधाराया गया। ग्वालबालों की मंडली के साथ प्रभु को विविध भोग अर्पित किए गए। पुष्पों और वन-उपवन की विशेष सजावट ने पूरे वातावरण को व्रज की छटा से सराबोर कर दिया। कृत्रिम वन और कुंजों से सजा मंदिर परिसर
संध्या समय ‘व्रज ही में करत विहार’ मनोरथ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कृत्रिम वन और कुंज सजाए गए, जिन्हें गुलाब, मोगरा और चंपा के पुष्पों से अलंकृत किया गया। इन सजावटों ने श्रद्धालुओं को व्रजधाम का अनुभव कराया। फलों की हटड़ी में विराजे नवनीत प्रियाजी
मनोरथ के तहत श्री नवनीत प्रियाजी को फलों की हटड़ी में विराजित किया गया। यहां चंदन की पत्तियों से बने बंगले को सुगंधित फूलों से सजाकर आकर्षक स्वरूप प्रदान किया गया। अधिक मास के इन विशेष मनोरथों ने श्रद्धालुओं को व्रज संस्कृति और पुष्टिमार्गीय परंपराओं के दिव्य भावों से जोड़ दिया।
Source link

