पीड़िता-गवाह के पलटने के बाद भी रेपिस्ट को उम्रकैद:नर्मदापुरम में डीएनए को अहम सबूत मानकर सुनाई सजा, दुष्कर्म के बाद हुई थी प्रेग्नेंट
नर्मदापुरम में कोर्ट ने 16 साल की नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार को आंखमऊ के रहने वाले 21 वर्षीय आरोपी बाबू उर्फ रंजीत यादव को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाते हुए सजा के साथ ही 2000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस सनसनीखेज मामले की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि सुनवाई के दौरान पीड़िता और मुख्य गवाह अपने बयानों से पलट गए थे, लेकिन इसके बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्य यानी डीएनए (DNA) रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को सख्त सजा सुनाई। नाबालिग के प्रेग्नेंट होने पर हुआ खुलासा
मामला मई 2024 का है। आरोपी ने नाबालिग लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया था। जब पीड़िता को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुईं और परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए, तब खुलासा हुआ कि वह चार महीने की गर्भवती है। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता के बयानों के आधार पर आरोपी बाबू उर्फ रंजीत के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसडीओपी पराग सैनी ने बारीकी से जांच की। विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता और आरोपी का डीएनए (DNA) टेस्ट कराया। प्रयोगशाला से आई इस डीएनए रिपोर्ट में साफ तौर पर पुष्टि हो गई कि आरोपी ने ही नाबालिग के साथ गलत काम किया था और उसी की वजह से वह गर्भवती हुई थी। गवाहों के पलटने के बाद कराया डीएनए टेस्ट अदालत में जब इस मामले का ट्रायल शुरू हुआ, तो पीड़िता और अन्य अहम गवाह अपने पुराने बयानों से मुकर गए। ऐसी स्थिति में अक्सर आरोपी बच निकलते हैं, लेकिन सरकारी वकील और अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी लखन सिंह भवेदी ने कोर्ट में मजबूत पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि गवाह भले ही दबाव या किसी अन्य कारण से बदल गए हों, लेकिन वैज्ञानिक सबूत (DNA रिपोर्ट) झूठ नहीं बोल सकते। माननीय न्यायालय ने इस वैज्ञानिक साक्ष्य को सबसे अहम और अकाट्य सबूत माना और आरोपी रंजीत यादव को नाबालिग के जीवन से खिलवाड़ करने का दोषी पाते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
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