BJP Office Power Outage: Suspended Electrician Alleges Danger

BJP Office Power Outage: Suspended Electrician Alleges Danger


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यह कहना है हीरापुरा 400 केवी जीएसएस के इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह का।

जयपुर में भाजपा प्रदेश कार्यालय में 11 जून को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान बिजली गुल हो गई थी। इस मामले में राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम ने सहायक इंजीनियर (AEN) विपिन वर्मा और इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह को 13 जून को सस्पेंड कर दिया था। वहीं जयपुर सिटी के अधीक्षण इंजीनियर आर.पी. गुप्ता को चार्जशीट जारी की गई थी।

दैनिक भास्कर से बातचीत में बाबू सिंह ने बताया- 11 जून को हुई ट्रिपिंग में मेरा दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और जिम्मेदारी थोपने के लिए सस्पेंड कर दिया गया। बाबू सिंह का आरोप है कि डेढ़ साल से खराब ब्रेकर की शिकायत बार-बार करने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

पहले PHOTOS से समझें क्या हुआ था उस दिन

ब्रेकर में गैस भर गई थी। इससे वह काम नहीं कर रहा था।

इस ब्रेकर के पॉइंट से कर्मचारी ने गैस निकाली थी।

इससे कर्मचारी के हाथ में डस्ट लग गई थी।

पोल में जगह-जगह सफेद डस्ट जमा हो गई थी।

पोल में सफेद डस्ट दिखाते हुए कर्मचारी।

11 जून को तेज गर्मी थी, लोड ज्यादा था

बाबू सिंह ने बताया- 11 जून को बहुत तेज गर्मी थी। लोड ज्यादा था। इसी दौरान ग्रिड के ब्रेकर से तेज आवाज आने लगी। आवाज सुनकर हम डर गए। फिर भी हमें अफसरों ने चालू लाइन में ही गैस भरने को कहा। अगर चालू लाइन में गैस भरा जाता तो ब्रेकर फट जाता और उससे कई लोगों की जान जाती। उन्होंने कहा- ब्रेकर से ऐसी आवाज आ रही थी, जैसी उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में कभी नहीं सुनी थी।

ब्रेकर से बहुत तेज आवाज आ रही थी। इससे कर्मचारी डर गए थे।

50-60 फीट दूर से ही आवाज सुनकर डर गए

बाबू सिंह ने बताया- 11 जून को ब्रेकर लॉकआउट में आ गया था। लॉकआउट का मतलब होता है कि ब्रेकर ऑन-ऑफ नहीं होता। तब सर ने कहा- इसमें सल्फर हेक्साफ्लोराइड (एसएफ-6) गैस कम हो गई है, जाकर चेक करो। जब मैं पास जाने लगा तो 50-60 फीट दूर से ही इतनी तेज आवाज आ रही थी कि मैं डर गया और वापस आ गया।

उन्होंने कहा- हमने सैकड़ों बार ब्रेकर में गैस भरी है, लेकिन इस तरह की आवाज कभी नहीं सुनी थी। ऐसे में हम काफी ज्यादा डर गए थे कि अगर चालू लाइन में गैस भरेंगे और ब्रेकर फट गया तो हम सब मारे जाएंगे।

हमने शटडाउन मांगा, सिस्टम ने इसे गलत मान लिया

बाबू सिंह ने आरोप लगाया- हमारा शटडाउन मांगना अधिकारियों को गलत लग गया। सिस्टम ने यह मान लिया कि हम काम नहीं करना चाहते। बिना शटडाउन के मरने वाला तरीका सही मान लिया गया। सेफ्टी के साथ काम करने की बात गलत मान ली गई। इसी कारण मुझे सस्पेंड किया गया।

डेढ़ साल से खराब था ब्रेकर, बार-बार अधिकारियों को बताया

बाबू सिंह ने कहा- यह पूरी घटना इसलिए हुई, क्योंकि पिछले डेढ़ साल से कोटा लाइन का ब्रेकर खराब चल रहा था। उसमें लगातार खराबी आ रही थी। हमने AEN बी.एल. मीणा, भरत जी और आशीष जी को कई बार बताया था कि इसे बदलवा दो, नहीं तो अगर यह फटा तो करोड़ों का नुकसान होगा।

उन्होंने आरोप लगाया- ब्रेकर में राख आ रही थी, गैस फेंक रहा था और आवाज भी आ रही थी। पिछले तीन-चार दिनों से उसमें बहुत तेज आवाज आने लगी थी, लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी।

जीएसएस के इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह जानकारी देते हुए।

ट्रिपिंग से मेरा लेना-देना नहीं

बाबू सिंह ने कहा- 11 जून को जो हीरापुरा जीएसएस पर ट्रिपिंग हुई, उसमें मेरा दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। मैं कोई फैसला लेने वाला अधिकारी नहीं हूं। मैं तो एक छोटा कर्मचारी हूं। ट्रिपिंग कब आएगी, सिस्टम कैसे चलेगा, यह सब बड़े अधिकारी तय करते हैं।

उन्होंने कहा- जो जिम्मेदार अधिकारी थे, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुझे जानबूझकर टारगेट किया गया है।

बाबू सिंह ने प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए लैटर लिखा है।

AEN और कंट्रोल रूम के अधिकारियों की थी जिम्मेदारी

बाबू सिंह ने कहा- AEN बी.एल. मीणा, AEN मेंटेनेंस और कंट्रोल रूम में सुमन स्वामी मैडम की जिम्मेदारी थी कि इस ब्रेकर को फ्री करके देने की। दोनों ने जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन अधिकारियों ने डेढ़ साल में एक बार भी गंभीरता से नहीं देखा कि इसमें क्या समस्या आ रही है।

उन्होंने कहा- अगर ब्रेकर फट जाता तो कितनी बड़ी जनहानि होती और निगम को कितना बड़ा नुकसान होता, इसका किसी ने संज्ञान नहीं लिया।

अश्विनी वैष्णव के मीडिया संवाद कार्यक्रम में 11 जून को बिजली गुल हो गई थी।

मंत्री जी के कार्यक्रम की कोई सूचना नहीं दी गई

बाबू सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा- मंत्री जी के आने की पूरे बिजली विभाग को कोई सूचना नहीं दी गई थी कि अलर्ट रहना है। जबकि हर बार जब कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तो पहले से सूचना दी जाती है। तब यार्ड में विशेष निगरानी रखी जाती है और शटडाउन भी नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा- अगर भाजपा प्रदेश कार्यालय में इतना बड़ा कार्यक्रम था तो विद्युत विभाग को पहले से सूचना क्यों नहीं दी गई?

भाजपा कार्यालय में जनरेटर की व्यवस्था क्यों नहीं थी?

बाबू सिंह ने कहा- भाजपा मुख्यालय में डीजल जनरेटर (डीजी) की व्यवस्था क्यों नहीं थी। अगर इतना बड़ा कार्यक्रम था तो बैकअप बिजली की व्यवस्था होनी चाहिए थी।

सस्पेंड करने वाले अधिकारी बोले- यह हमारा इंटरनल मामला

इस मामले को लेकर सस्पेंशन ऑर्डर जारी करने वाले चीफ प्रोफेशनल ऑफिसर अमिताभ गुप्ता से बात की। अमिताभ गुप्ता ने कहा- यह हमारा इंटरनल मामला है। मैं इस पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता। यह कहते हुए उन्होंने मोबाइल पर फोन काट दिया।

हमने इसे लेकर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उनके यहां से मंत्री के मीटिंग में होने की बात कहकर कॉल काट दिया गया।

ये है पूरा मामला

जयपुर के भाजपा प्रदेश मुख्यालय में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान 11 जून को अचानक बिजली गुल हो गई थी। कार्यक्रम के दौरान तीन बार बिजली गुल हुई थी और करीब 13 मिनट तक रेल मंत्री को अंधेरे में ही मीडिया को संबोधित करना पड़ा था। बाद में जांच में सामने आया कि हीरापुरा स्थित 400 केवी जीएसएस पर तकनीकी खराबी और ट्रिपिंग के कारण जयपुर के कई इलाकों के साथ भाजपा प्रदेश मुख्यालय की बिजली भी प्रभावित हुई थी। घटना के बाद ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद निगम ने कार्रवाई की थी।

मामले में राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम ने सहायक इंजीनियर विपिन वर्मा और इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह को सस्पेंड कर दिया था। वहीं जयपुर सिटी के अधीक्षण इंजीनियर आर.पी. गुप्ता को चार्जशीट जारी की गई थी। निगम की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई थी।

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