उत्तर कोयल मुख्य नहर पर चल रहा रीमॉडलिंग कार्य:वाप्कोस अध्यक्ष ने लिया जायजा, जून तक काम पूरा करने के निर्देश; पूर्व सांसद ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल
उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना के अंतर्गत चल रहे मुख्य नहर रीमॉडलिंग कार्य का रविवार को जल शक्ति मंत्रालय की एजेंसी वाप्कोस की अध्यक्ष सह सीएमडी शिल्पा सचिन शिंदे ने निरीक्षण किया। देव प्रखंड के केताकी से मुख्य नहर मार्ग होते हुए अंबा एरका कॉलोनी तक निर्माण कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुख्य नहर में चल रहे सीएनएस वर्क, लाइनिंग, पुल-पुलिया, सीडी, वेंट, सीआर गेट, एचआर गेट समेत अन्य निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान वाप्कोस के महाप्रबंधक अमित गुप्ता, मुख्य अभियंता आरके सिंह तथा जल संसाधन विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। धीमी गति पर जताई नाराजगी कई स्थानों पर निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर वाप्कोस अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर हाल में जून महीने तक कार्य पूरा किया जाए। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करने की चेतावनी दी। कार्य समय पर पूरा होना किसानों के हित में बेहद जरूरी है। भीम बराज मोहम्मदगंज से लेकर अंतिम छोर तक करीब 109 किलोमीटर क्षेत्र में 11 पैकेज में नहर का रीमॉडलिंग कार्य कराया जा रहा है। इनमें दो पैकेज झारखंड क्षेत्र में और पैकेज संख्या तीन से 11 तक बिहार के मगध क्षेत्र में पड़ते हैं।
बारिश, बिजली पोल और सामग्री की कमी बनी बाधा उत्तर कोयल नहर परियोजना के कार्य में कई तरह की बाधाएं सामने आ रही है। कहीं बारिश के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है तो कहीं पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने से निर्माण की गति धीमी है। कई जगह बिजली के पोल हटाने में देरी के कारण भी कार्य बाधित हो रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों का मानना है कि जून महीने तक सभी कार्यों का पूरा होना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। पूर्व सांसद ने उठाया गुणवत्ता का मुद्दा पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने मदनपुर में वाप्कोस अध्यक्ष के साथ बैठक कर नहर परियोजना की प्रगति और गुणवत्ता को लेकर चर्चा की। उन्होंने धीमी गति से चल रहे लाइनिंग कार्य पर चिंता जताते हुए कहा कि समय पर कार्य पूरा नहीं होने से किसानों को सिंचाई संकट का सामना करना पड़ रहा है। आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सीएनएस कार्य में मोरम की जगह मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही 185 आरडी से 189 आरडी के बीच गुणवत्ता प्रभावित होने और 151.33 आरडी से 168 आरडी के बीच बनी लाइनिंग के ध्वस्त होकर नहर बेड में गिर जाने की जानकारी भी अध्यक्ष को दी। पूर्व सांसद ने खरीफ मौसम से पहले कुटकू डैम में फाटक लगाने और खराब गुणवत्ता वाले कार्यों को दुरुस्त कराने की मांग की। इस पर वाप्कोस अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो बरसात से पहले कुटकू डैम में फाटक लगाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। गुणवत्ता में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसानों ने जताई चिंता निरीक्षण और बैठक के दौरान किसानों ने भी नहर परियोजना की धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त की। किसानों का कहना था कि सिंचाई सुविधा समय पर बहाल नहीं होने के कारण हर साल फसल प्रभावित हो रही है। वहीं सिमरसौत गांव के समीप सीडी निर्माण नहीं होने से तटबंध क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी जताई गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि उत्तर कोयल नहर परियोजना का कार्य पूरा होने और कुटकू डैम में गेट लगने से मगध क्षेत्र के कई प्रखंडों में बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जिससे किसानों को काफी राहत मिलेगी।
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