औरंगाबाद में बिना टेंडर वाहनों से फर्जी टैक्स की वसूली:गुलाबी, सफेद रसीद थमा कर 20 से 100 रुपए ले रहे; 31 मार्च को समाप्त हुआ था टेंडर

औरंगाबाद में बिना टेंडर वाहनों से फर्जी टैक्स की वसूली:गुलाबी, सफेद रसीद थमा कर 20 से 100 रुपए ले रहे; 31 मार्च को समाप्त हुआ था टेंडर




औरंगाबाद शहर में इन दिनों ‘फर्जी टैक्स वसूली’ का संगठित खेल खुलकर सामने आ रहा है। बाईपास चौराहा, जसोईया मोड़ और अदरी नदी पुल के पास कुछ लोग हाथ में गुलाबी और सफेद रसीद बुक लेकर ट्रक, ऑटो-टेंपो और छोटी मालवाहक गाड़ियों के चालकों से जबरन पैसा वसूल रहे हैं। वसूली करने वाले खुद को नगर परिषद का कर्मचारी बताकर चालकों पर दबाव बना रहे हैं और पैसे नहीं देने पर गाड़ी आगे नहीं जाने देने की धमकी दे रहे हैं। शनिवार को शहर के बाईपास इलाके में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक वसूलीकर्मी ट्रक ड्राइवर से उलझता दिखा। उसके हाथ में रसीद बुक थी और वो बार-बार कह रहा था कि ये नगर परिषद का एंट्री टैक्स है, रसीद कटवाना ही पड़ेगा। ड्राइवर की ओर से विरोध करने पर वसूली कर रहा शख्स जबरदस्ती पर उतर आया। स्थानीय लोग बोले- सुबह से लेकर शाम तक अलग-अलग जगहों पर हो रही वसूली स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसे दृश्य अब आम हो चुके हैं और सुबह से लेकर शाम तक अलग-अलग जगहों पर यह अवैध वसूली जारी रहती है। दूसरा मामला शहर के टिकरी रोड से सामने आया। जहां कारोबारी रमाकांत सिंह उर्फ मंटू सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें टैक्स वसूलने वाले व्यक्ति की ओर से स्पष्ट कहा जा रहा है कि ये नगर परिषद के की ओर से टेंडर के बाद वसूला जा रहा है। टैक्स न देने पर चालकों के साथ की जाती है मारपीट ड्राइवरों का आरोप है कि उनसे 20 से 100 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। एक ऑटो ड्राइवर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम दिन भर में मुश्किल से 200-300 रुपए कमाते हैं, उसमें से भी इन लोगों को देना पड़ता है। मना करने पर गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं। कहते हैं ऊपर तक सेटिंग है। 31 मार्च को ही समाप्त हो चुका है टेंडर वसूली मामले की जानकारी के बाद जब जानकारी जुटाई गई तो सामने आया कि नगर परिषद की ओर से इस वित्तीय वर्ष में किसी भी प्रकार की वसूली के लिए कोई नया टेंडर जारी ही नहीं किया गया है। शहर में प्रवेश शुल्क, पार्किंग या अन्य शुल्क वसूलने के लिए एजेंसी का चयन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। पिछला टेंडर 31 मार्च 2026 तक ही वैध था, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी है। इसके बाद अब तक कोई नया टेंडर जारी नहीं हुआ है। अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष वसूली के लिए कोई अधिकृत एजेंसी नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग अवैध रूप से वसूली कर रहे हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है और प्रशासन जल्द ही सख्त कार्रवाई करेगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, बिना वैध अनुमति और टेंडर के सार्वजनिक स्थान पर किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलना पूरी तरह अवैध है। यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 384 (जबरन वसूली) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।



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