गांवों में 4 हजार महिला-किसानों ने अपनाईं टिकाऊ कृषि पद्धतियां:राज्य स्तरीय कार्यशाला में साझा हुए अनुभव, जलवायु अनुकूल कृषि मॉडल पर हुआ मंथन
जलवायु परिवर्तन और घटते प्राकृतिक संसाधनों की चुनौतियों के बीच राजस्थान में जलवायु अनुकूल कृषि ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी विषय पर जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में महिला किसानों के अनुभव, नवाचार और टिकाऊ कृषि मॉडल साझा किए गए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कृषि को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जल संरक्षण आधारित बनाने पर जोर दिया। सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस (CMF) की ओर से जयपुर स्थित हयात प्लेस में “जलवायु अनुकूल कृषि: हितधारकों के अनुभवों की समझ एवं विस्तार की संभावना” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में दौसा जिले के लालसोट ब्लॉक में संचालित तीन वर्षीय परियोजना की उपलब्धियों और सीखों को साझा किया गया। परियोजना के तहत 60 से अधिक गांवों की 4 हजार से ज्यादा महिला किसानों को जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम के दौरान परियोजना के अनुभवों और उपलब्धियों पर आधारित इम्पैक्ट स्टोरी बुक का भी विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) की स्टेट मिशन डायरेक्टर प्रियंका गोस्वामी ने महिला किसानों को समूह आधारित खेती और उद्यम से जुड़कर ‘लखपति किसान’ बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिला किसानों के उत्पादों के लिए बेहतर मार्केट लिंकेज की आवश्यकता है। इस दिशा में राजीविका जल्द ही एक ई-पोर्टल शुरू करेगी, जिससे महिला किसान अपने उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचा सकेंगी। CmF की कार्यकारी निदेशक मालिका श्रीवास्तव ने कहा कि ग्रामीण राजस्थान में महिला किसान जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि उचित ज्ञान, तकनीक और संस्थागत सहयोग मिलने पर किसान ऐसी कृषि पद्धतियां अपनाने में सक्षम होते हैं, जो आजीविका को मजबूत करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी सहायक हैं। कार्यशाला में आयोजित दो पैनल चर्चाओं में महिला किसानों, सामुदायिक प्रतिनिधियों, एग्री-टेक कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों, सीएसआर प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान माइक्रो इरिगेशन, बायोगैस, प्राकृतिक खेती और सामूहिक उद्यम मॉडल के सकारात्मक परिणामों को साझा किया गया। साथ ही राजस्थान में जलवायु अनुकूल कृषि के विस्तार, चुनौतियों और सहयोग की संभावनाओं पर भी मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने छोटे और सीमांत किसानों तक टिकाऊ कृषि तकनीकों और सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाओं, सामुदायिक संस्थाओं, तकनीकी सेवा प्रदाताओं और विकास संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। कोट: “जब समुदायों को उचित ज्ञान, तकनीक और संस्थागत सहयोग मिलता है, तो वे ऐसी कृषि पद्धतियां अपनाने में सक्षम होते हैं जो आजीविका सुदृढ़ करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित करती हैं।”
— मालिका श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक, सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस (CmF)
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