पानीपत में 15 दिन में सील होंगी डेयरियां:संचालक DC से मिले, कहा- हम तो शुल्क देने को भी तैयार, बिंझोल में जगह दी जाए
पानीपत शहर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण, गंदगी और नालों के जाम होने की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन व नगर निगम द्वारा डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के 15 दिनों के अल्टीमेटम के बाद विवाद गहरा गया है। निगम के इस सख्त रवैये के खिलाफ अब डेयरी संचालक लामबंद होने लगे हैं। डेयरी संचालकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने DC को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर 15 दिन में शिफ्टिंग के आदेश पर पुनर्विचार करने और 2002-2003 में आवंटित प्लॉटों के फर्जीवाड़े की जांच करवाने की गुहार लगाई है। डोर-टू-डोर गोबर उठाने की 2-3 साल पुरानी नीति लागू करने की मांग उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में डेयरी प्रधान गुलशन कुमार सहित अन्य संचालकों ने कहा है कि नगर निगम उपायुक्त द्वारा शहर में चल रही डेयरियों को 15 दिनों के भीतर शहर से बाहर शिफ्ट करने का फरमान जारी किया गया है। संचालकों ने याद दिलाया कि करीब 2-3 साल पहले नगर निगम ने एक पॉलिसी बनाई थी, जिसके तहत निगम को प्रत्येक डेयरी से डोर-टू-डोर गोबर उठाने की व्यवस्था करनी थी और इसके एवज में डेयरी संचालकों से तय शुल्क लिया जाना था। डेयरी संचालकों का कहना है कि वे इस शुल्क को देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, इसलिए निगम इस पॉलिसी को तुरंत प्रभाव से लागू करे। तब तक वे अपनी डेयरियों के आसपास साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखेंगे और निगम के सभी नियमों का पालन करेंगे। बिंझोल गांव में आबंटित प्लॉटों के घोटाले का मुद्दा उठाया ज्ञापन के दूसरे प्रमुख बिंदु में डेयरी संचालकों ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि नगर निगम ने वर्ष 2002-2003 में बिंझोल गांव में डेयरियों को बाहर शिफ्ट करने के उद्देश्य से प्लॉट आवंटित किए थे। सभी असली डेयरी संचालक वहां अपनी डेयरियां ले जाने को पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन आरोप है कि नगर निगम अधिकारियों ने वे सभी प्लॉट असली डेयरी संचालकों को आबंटित करने की बजाय अपने पसंदीदा पार्षदों, चहेतों और अन्य रसूखदार लोगों को बांट दिए। 2007 के एसडीएम आदेशों पर कार्रवाई न होने पर उठाए सवाल संचालकों ने खुलासा किया कि सन 2007 में तत्कालीन SDM ने बिंझोल गांव के इन गलत तरीके से बांटे गए प्लॉटों का आबंटन रद्द करने का बाकायदा आदेश जारी किया था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि 2007 से लेकर आज तक उन फर्जी आबंटनों पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। डेयरी संचालकों ने उपायुक्त से पुरजोर मांग की है कि गलत तरीके से चहेतों को बांटे गए बिंझोल के उन सभी प्लॉटों का आबंटन तुरंत रद्द किया जाए और वे प्लॉट असल डेयरी संचालकों को आवंटित किए जाएं ताकि वे अपनी डेयरियों को वहां सफलतापूर्वक शिफ्ट कर सकें।
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