Varanasi & Ramnagar Host Dul-Dul Processions for 5 Moharram 2026

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वाराणसी की दालमंडी से उठा पांच मोहर्रम का जुलूस।

वाराणसी के दालमंडी से रविवार की रात पांच मोहर्रम का जुलूस उठाया गया। यह जुलूस दालमंडी की मलबे से भरी सड़कों और उफनते सीवर के बीच से निकला और दरगाह फातमान पर देर रात समाप्त हुआ। जुलूस में अलम व दुलदुल मौजूद रहा। वक्फ इमामबाड़ा व मस्जिद मीर इमाम अली व मे

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वहीं रामनगर में काशी नरेश महाराज बलवंत बलवंत सिंह की मन्नत का दुलदुल उठाया गया। जिसमें मन्नत मांगने के लिए जायरीन उमड़े।

देखिये जुलूस की तस्वीरें…

छत्तातल स्थित वक्फ इमामबाड़ा व मस्जिद इमाम अली व मेहंदी बेगम से निकला अलम का जुलूस।

मुजफ्फ्फरपुर के रहने वाले वज्जन खां के पोते नजाकत अली ने पढ़ी सवारी।

अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने किया नौहा मातम।

जुलूस उठने पर मुजफ्फरपुर से आये वज्जन खां के पोते ने पढ़ी सवारी

इमामबाड़े के मुतवल्ली मुनाजिर हुसैन ने बताया कि यह इमामबाड़ा और मस्जिद सैकड़ों साल पुराने हैं। यहां से पांचवीं मोहर्रम को कदीमी (पुराना) जुलूस सैंकड़ों सालों से उठाया जा रहा है। इस जुलूस में मुजफ्फरपुर के वज्जन खां के पोते नजाकत अली ने सवारी पढ़ी। कई पीढ़ियों से जुलूस में सवारी पढ़ने आ रहे नजाकत ने कहा कि ‘यहां आने से दिल को सुकून मिलता है। इमाम हुसैन की हाजिरी लगाने हम हर साल यहां आते हैं।

हकीम काजिम के मकान से शुरू हुआ नौहा-मातम

मुनाजिर हुसैन ने बताया- जुलूस; गोविंदपुरा, नारियल बाजार, चौक होते हुए दालमंडी स्थित हकीम काजिम जाफरी के आवास पर पहुंचा। यहां से अंजुमन हैदरी ने नौहाख्वानी व मातम शुरू किया और जुलूस को लेकर आगे बढ़ी। जुलूस में रास्ते भर नौहाख्वानी व मातम होता रहा। जिसमें शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब जैदी, शफाअत हुसैन शोफी, अंसार बनारसी, शानू, राजा आदि ने नौहाख्वानी की l जुलूस लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचा और फिर यहां से वापस औरंगाबाद, नई सड़क कपड़ा मार्केट होता हुआ देर रात इमामबाड़े में समाप्त हुआ।

उठाया गया काशी नरेश की मन्नत का दुलदुल का जुलूस, लोगों ने मांगी मन्नतें

रामनगर में महाराज बनारस की मन्नत का दुलदुल उठा

पांचवीं मोहर्रम को ही महाराज बनारस की मन्नत का दुलदुल का जुलूस उठाया गया। यह जुलूस गोलाघाट स्थित काशी नरेश के इमामबाड़े से निकाला गया। यह दुलदुल हिंदू भाई हरि नारायण सिंह ने सजाया और जमील अहमद उर्फ बाबू खां के परिजनों ने उठाया। इस जुलूस में मन्नत मांगने वालों का जमावड़ा लगा रहा। 350 साल पुराना है जुलूस

जुलूस उठा रहे जमील खां ने बताया कि यह जुलूस 1738 से 1770 तक काशी के नरेश रहे महाराजा बलवंत सिंह की मन्नत का जुलूस है। इस जुलूस को तभी से हम लोग का परिवार उठा रहा है। इसमें राज परिवार से आज भी खर्च मिलता है। इस जुलूस में कौमी एकता की झलक दिखाई देती है। सही धर्म और वर्ग के लोग इमाम हुसैन के दुलदुल पर मन्नत मांगने आते हैं।

पंचवटी कर्बला पर हुआ समाप्त

जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ पंचवटी मंदिर के पास स्थित कर्बला पहुंचा और ठंडा हुआ। इस जुलूस में हजारों की संख्या में लोग उमड़े और जुलूस के साथ-साथ चलते रहे।



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